अश्क
अश्क आँखों से निकलना बेवज़ह होता नहीं,
आह निकली है तो दिल में दर्द भी होगा कहीं.
गर मेरी खामोशियों को तुम समझ पाते नहीं,
तो मेरे अल्फाज़ का भी कुछ असर होगा नहीं।
-Unknown
Labels: शेर -ओ - शायरी
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